धार्मिक

कलयुग में श्री राम जैसा बनना है तो अपनाये उनके ये 4 गुण!

श्री राम

भगवान श्री राम एक ऐतहासिक महापुरुष थे और इसके पर्याप्त प्रमाण है।

शोधानुसार पता चलता है की भगवान श्री राम का जन्म 5114 ईस्वी पूर्व हुआ था।

चैत्र मॉस की नवमी को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है।

उपरोक्त जन्म का समय भगवान राम की वंशपरम्परा और उनकी पीढ़ियों से भी सिद्ध होता है।

अयोध्या के इतिहास और अयोध्या की वंशवली से भी यह सिद्ध होता है।

भगवान राम को विष्णु के 10 अवतारों में 7वां अवतार माना जाता है।

श्री राम से पहले भगवान विष्णु ने मत्स्य ( मछली ), कुमर ( कछुआ ),

वराह ( सूअर ), नरसिंघ ( मनुष्य एवं सिंह ), वामन ( बोना ), और परशुराम के रूप में जबकि बाद में

श्री कृष्ण , बुध और कल्कि ( अवतार होना बाकि ) के रूप में अवतार लिया था।

भगवान श्री राम का नामकरण!

भगवान श्री राम का नामकरण रघुवंशियों के गुरु महर्षि वशिष्ठ ने किया था। वशिष्ठ के

अनुसार राम शब्द दो बीजाक्षरों अग्रि बीज और अमृत बीज से मिलकर बना है।

ये अक्षर दिमाग , शरीर और आत्मा को शक्ति प्रदान करते है।

भगवान श्री राम को सूर्यवंशी भी कहा जाता है!

भगवान श्री राम का जन्म इक्ष्वाकु वंश में हुआ था जिसकी स्थापना भगवान सूर्य के पुत्र

राजा इक्ष्वाकु ने की थी। इसी कारण भगवान राम को सूर्यवंशी भी कहा जाता है।

श्री राम जैसा बनना है तो अपनाये उनके ये 4 गुण!

1) सहनशीलता व् धैर्य 

भगवान राम का सबसे विशेष गुण उनकी सहनशीलता व् धैर्य। इसी गुण से

उन्होंने 14 वर्ष का लम्बा वनवास काटा , राज सिंघ्हासन होते हुए भी सारी सुख सुविधा

को त्याग कर एक सन्यासी का जीवन व्यतीत किया। प्रभु राम जैसे बनने के लिए उनके

इस गुण को अपनाना बहुत ही आवश्यक है। मनुष्य के अंदर ये गुण होते हो तो उन्हें सफल

होने से कोई नहीं रोक सकता।

2) दयालु स्वभाव

पुराणिक कथाओ के अनुसार भगवान राम का स्वभाव बहुत ही दयालु और निर्मल था ,

वे किसी में भी वेदभाव और किसी को भी बड़ा जा छोटा नहीं समझते थे उनकी दृष्टि में

सब एक समान थे। उनका मित्र केवट हो या सुग्रीव , निषादराज या विभीषण हर जाती

हर वर्ग के मित्रो के साथ भगवान श्री राम दिल से रिश्ता रखते थे। उनका ये गुण उनको

दयालु स्वभाव का बनाता था।

3) आज्ञाकारी

भगवान राम दयालु होने के साथ साथ बड़े ही आज्ञाकारी थे। वे सदैव अपने बड़ो

की आज्ञा का पालन करते थे पिता , माता , भाई , बंधू आदि सभी की आज्ञा का पालन

करते थे। उनका ये गुण उनको सदैव सभी की नजरों में महान बनाता था।

4) आदर्श भाई

भगवान राम के तीन भाई लक्ष्मण , भरत और शत्रुगण ये तीनो भाई उनकी

सौतेली माँ के पुत्र थे पर प्रभु श्री राम ने सभी भाइयो के प्रति सगे भाई से बढ़कर त्याग

और समर्पण का भाव रखते हुए उन्हें स्नेह और प्यार दिया। उनका ये गुण उनको आदर्श भाई

के सम्मान से आज भी पूजता है।

 

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