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Vishnupad Mandir Gaya जहां हैं भगवान विष्णु के पग चिन्ह !

Vishnupad mandir gaya

Vishnupad Mandir Gaya

Vishnupad mandir gaya जहां हैं भगवान विष्णु के पग चिन्ह !

Vishnupad mandir gaya

हिन्दू तीर्थयात्रियों के लिए बिहार की गया भूमि से होकर निकल रही फल्गु नदी दिवगंतो का पिंडदान करने हेतु काफी प्रसिद्ध है !

फल्गु नदी के तट पर मौजूद Vishnupad mandir gaya श्रदालुओ व् पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है !

पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के पग चिन्ह के निशान पर Vishnupad mandir gaya का निर्माण कराया गया है !

हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के इस मंदिर को आस्था का केंद्र माना गया है  !

यह मंदिर 30 मीटर की ऊंचाई पर है , और इसमें 8 खम्भे हैं ! इन खम्भों पर चांदी की परते चढ़ाई हुयी है !

मंदिर के गर्भग्रह में भगवान विष्णु के 40 सेंटीमीटर लम्बे पांव के निशान है !

मंदिर का नवीकरण 1787 में इंदौर की महारानी अहिल्या बाई ने करवाया था !

दन्त कथाओ के अनुसार गयासुर नामक दैत्य का वध करते समय भगवान विष्णु के पदचिन्ह यहाँ पड़े थे

जो आज भी Vishnupad mandir gaya में देखे जा सकते है ,

जिनकी पूजा करने देश विदेश से श्रदालु जहाँ पर आते है !

गया का उलेख्य रामायण में भी मिलता है !

यहाँ पर  खुदाई करने पर सम्राट अशोक के संबंद में आदेश पत्र मिला था !

मध्यकाल में यह शहर मुग़ल सम्राटो में अधीन था !

उसी समय यहाँ के कुछ स्थानों में राजपूतो का अधिकार रहा !

यहाँ पर अनेक क्षेत्रीय के राजाओं ने राज किया !

1787 में होल्कर वंश की महारानी अहिल्याबाई ने Vishnupad mandir gaya का पुननिर्माण कराया था !

पितृपक्ष के अवसर पर यहाँ पर श्रदालुओं की काफी भीड़ जुड़ती है !

ये है गया के दर्शनीय स्थल

बानबर पहाड़ :

गया से लगभग 20 किमी  दूर बेलागंज से 10 किमी  बानबर पहाड़ स्थित है !

इसके ऊपर भगवान शिव का मंदिर है , यहाँ हर बर्ष श्रदालु सावन के महीने में जल चढ़ाते है !

कहते है यह मंदिर बाणासुर ने बनवाया था जिसकी मरम्मत सम्राट अशोक ने करवाई थी !

इसके निचे सतघरवा की गुफा है , जो प्राचीन स्थापत्य कला का नमूना है !

गया से लगभग 25 किलोमीटर पूरब में टनकुप्पा प्रखंड में चोवार नाम का एक गाओ है जो की गया जिले में एक

प्राचीन शिव मंदिर है जो अपनी महानता को दर्शाता है !

अद्धभूत शिव मंदिर :

गया से 35 किलोमीटर दूर एक गाँव है चोवार , जो की देखने में ही बहुत ही अद्धभूत है !

इस गाँव में एक प्राचीन शिव मंदिर है , जहाँ सेंकडो श्रदालो बाबा बालेश्वरनाथ पर जल चढ़ाते है !

यह जल कहाँ जाता है , आज तक कुछ नहीं पता नहीं चला !

हजारो सालो में  इस चमत्कार की जांच करने आये सेंकडो वैज्ञानिको ने भी ये दावा किया है की

ये भगवान शिव का चमत्कार है ! आज भी अस्टधातु की अनेक मुर्तिया शिव मंदिर में देखने को मिलती है !

कोटेश्वर नाथ शिव मंदिर :

यह बहुत  प्राचीन शिव मंदिर है जो  मरोहर नदी के किनारे पर एक गाँव में स्थित है !

यहाँ अपर महाशिवरात्रि का मेला लोग बड़ी दूर दूर से देखने आते है  !

यहाँ पहुंचने हेतु गया से लगभग 30 किमी उत्तर पटना – गया मार्ग

पर स्थित मखदुमपुर से पायीबिगहा समंसारा होते हुए जाना होता है !

पायीबिगहा से इसकी दूरी लगभग 2 किमी है !

ब्रम्ह योनि पहाड़ी :

440 सीढ़ियां को पार करना होता है इस पहाड़ी की चोटी पर चढ़ने के लिए !

पहाड़ी के शिखर पर भगवान शिव का मंदिर है !  मंदिर बहुत बड़े  बरगद के पेड़ के निचे स्थित है !

इस स्थान का उलेख्य रामायण में भी किया गया है ! दंतकथाओं पर विश्वास किया जाए तो पहले फल्गु नदी इस पहाड़ी के ऊपर

से बहती थी लेकिन देवी सीता के श्राप के प्रभाव से अब यह नदी पहाड़ी के निचे से बहती है !

यह पहाड़ी हिन्दुओ के लिए काफी पवित्र तीर्थस्थानों में से एक है !

मंगला गोरी :

पहाड़ पर स्थित यह मंदिर देवी पार्वती माँ शक्ति को समर्पित है ! इस स्थान को 18 शक्तिपीठो में से एक माना गया है !

माना जाता है की जो भी यहाँ पूजा कराते है उनकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है !

इसी मंदिर के परिवेश में माँ काली , श्री गणेश , हनुमान तथा भगवान शिव के मंदिर स्थित है !

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