आध्यात्मिक

संत रविदास कौन थे और रविदास जयंती कब मनाई जाती है?

संत रविदास कौन थे और रविदास जयंती कब मनाई जाती है?

संत रविदास कौन थे?

संत रविदास (रैदास) का जन्म काशी में माघ पूर्णिमा दिन रविवार को संवत 1388 को हुआ था!

उनकी माता का नाम श्रीमति कलसा देवी और पिता का नाम श्रीसंतोख दास जी थे,

और उनकी पत्नी का नाम लोना था ।

रैदास जी ने साधुओ संतो  की संगति में रहकर व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया था!

उन्होंने जूते बनाने का काम किया करते थे औऱ ये उनका अभियासी काम था,

और बह अपना काम पूरी लगन तथा परिश्रम से करते थे,

और अपना सारा काम  समय और जिम्मेबारी से करते थे!

उनकी अच्छे और नेक कामो और उनकी मधुर बानी से उनके सम्पर्क में आने वाले लोग भी बहुत प्रसन्न रहते थे!

बचपन से ही वह बहुत ही दयालु और दुसरो की सहायता करने वाले शक्शियत थे,

और दूसरों की सहायता करना उनका स्वभाव बन गया था!

ऋषि मुनियो की सेवा करना वो अपना धर्म समझते थे!

वह शेष समय ईश्वर के भजन तथा साधुओ संतो के सत्संग में व्यतीत करते थे!

संत रविदास का जीवन परिचय

एक प्राचीन कथा के अनुसार रविदास जी अपने मित्र के साथ खेल रहे थे!

अगले दिन वो मित्र नहीं आता है तो उन्होंने अपने उस मित्र को ढूंढ़ने इधर उधर लगते है!

लेकिन जब उनको पता चलता है की किसी कारण उनके मित्र की मृत्यु हो गयी है,

तो ये देखकर रविदास जी को बहुत दुःख पहुंचता है,

और वो अपने मृत मित्र को कहते है की मित्र उठो ये समय सोने का नहीं है मेरे साथ खेलने का है,मेरे साथ खेलो!

ये सुनकर उनका मृत मित्र जीबित होकर उनके सामने खड़ा हो जाता है!

ये बात इसलिए होती है क्युकी उन्होंने बचपन से ही दिव्या शक्तियों का ज्ञान था,

लेकिन जैसे-जैसे वह बड़े होते गए और उनका समय निकलता गया,

वो भगवान राम और कृष्ण की भक्ति में लीन होते गए,

और इस तरह वो लोगो का भला करते गए और संत बन गए!

संत रविदास जी के विचार

रविदास जी कहते है की भगवान उनके हृदये में निबास करते है,

जिनके हृदये में किसी दूसरे के प्रति बैर भावना न हो, किसी भी तरह की लालच जा द्वेष न हो!


ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन।
पूजिए चरण चंडाल के जो होने गुण प्रवीन।।

इसका अर्थ कर्म करने से ही इंसान पहचाना जाता है इंसान कर्म अच्छा करेगा तो लोग उसे पहचानेगे,

इंसान अपने कर्म करने से बड़ा जा छोटा माना जाता है!

कर्म ही उसको ऊँचा जा निचा बनाते है!
इंसान को हमेशा अपना कर्म करना चाहिए और साथ में कर्म करने वाले फल की भी आशा नहीं शोड़नी चाहिए,

क्युकी कर्म करना हमारा धर्म है और फल हमारा सौभाग्य!

रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच।
नकर कूं नीच करि डारी है, ओछे करम की कीच।।

इसका अर्थ इंसान कभी भी अपने मन के अंदर अहंकार को जन्म न दें,

एक छोटी चींटी शकर के दानों को बीन सकती है पर एक बड़ा सा हाथी ऐसा नहीं कर सकता!

मोह-माया में फंसा जीव भटकता रहता है, इस माया को बनाने वाला ही मुक्ती दाता है!

मन चंगा तो कठौती में गंगा।

मन में ही पूजा मन में ही धूप,मन में ही दिखे सहज स्वरूप।।

इसका अर्थ – इंसान के अच्छे और निर्मल मन में ही भगवान् वास करते हैं,

यदि उस इंसान के मन में किसी के प्रति घृणा नहीं है, कोई लालच नहीं है तो,

ऐसे मन में ही ईश्वर का मंदिर माना जाता है, और ऐसे मन में ही ईश्वर निबास करते है!

कृष्ण,करीम,राम,राघव,हरी जब लग एक न पेखा।

,वेद कतेब कुरान, पुरानन, सहज एक नहिं देखा।।

इसका अर्थ – कृष्ण , करीम, राम , राघव , हरी सब एक ही  प्रभु  परमेश्वर के अलग-अलग नाम हैं!

वेदो , क़ुराणो और पुराणों  आदि सभी ग्रंथों में एक ही ईश्वर की बात करते हैं,

और सभी ईश्वर की भक्ति के लिए का पाठ पढ़ाते हैं!

रैदास कहै जाकै हदै, रहे रैन दिन राम।
सो भगता भगवंत सम, क्रोध न व्यापै काम।।

इसका अर्थ – जिस ह्रदय में दिन-रात राम का वास रहता है,

ऐसा भक्त स्वयं राम के समान होता है!

राम नाम की ऐसी माया है कि इसे दिन रात जपने वाले साधक को न तो क्रोध आता है,

और न ही कभी काम बासना उस पर हावी होती है!

लोग रविदास जयंती क्यों मनाते हैं?

संत रविदास जी 14 शताब्दी में पैदा हुए थे!

देश के भक्ति आंदोलन के अन्य कईं संतो मेंसंत रविदास महाराज जी  का नाम भी शामिल  है!

इनके अनुयायी भारत की उन जातियौ से हैं जिन्हें भारत में अलग समझा जाता था!

जूते बनाने वाले, मैला उठाने वाले समाज के गरीब लोगों के रविदास एक भगवान की तरह से हैं!

हर समाज अपने भीतर एक गुरु को तलाशता रहता है,

ताकि उसको आदर्श बना कर वह  अच्छे मार्ग पर रहे और अपनी अगली पीढ़ी का मार्गदर्शन कर सकें!

हम देश मे जितनी भी महापुरुषों की जयंती मनाते हैं उन सभी मे यही उद्देश्य निहित रहता है!

इस देश मे संत और फ़क़ीर को सदैव एक राजा से अधिक सम्मान मिला है!

बड़े से बड़ा राजा भी भी एक संत के चरण में बैठ कर गर्व का अनुभव करता है!

रविदास जयंती कब मनाई जाती है?

संत रविदास जयंती हिन्दूकैलेंडर के अनुसार माघ महीने को मनाई जाती है,

उनका जन्म वाराणसी में कशी नगरी में हुआ था,

जहाँ बड़े बड़े विद्वान शिक्षा ग्रहण करने  विश्व विद्यालय जाते है,

उनकी माता का नाम श्रीमति कलसा देवी और पिता का नाम श्रीसंतोख दास जी था,

उन्होंने लोगों को बिना भेदभाव के आपस में प्रेम करने की शिक्षा दी!

Conclusion:

ऊपर हमने संत रविदास जी के बारे में लिखा है की संत रविदास जी की बानी से हमें ये प्रेणना मिलती है,

की किसी के मन में किसी के प्रति ऊंच नीच की भावना नहीं होनी चाहिए जैसे “एक जोत सर्ब ब्यापक”!

 

 

 

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