कहानी

अनूठा चोर | Kids moral story in hindi | Baal kahani

Kids moral story in hindi

Kids moral story in hindi

अनूठा चोर | बाल कहानी (Anutha chor | Baal kahani)

Kids moral story in hindi

बात पुराणी है किसी गांव में चोर था ! वह चोर साल में केवल एक बार ही चोरी करता था !

साल का वो दिन आया , जब वह चोरी करने के लिए निकल पड़ा !

उसे जंगल से गुजरते हुए एक सेठ मिला ! सेठ चोर को देखकर बड़ा घबराया !

चोर ने उसे कहा – ” अरे सेठ , तुम इतने क्यों घबरा रहे हो ?

में तुम्हे नहीं लूटूँगा ! मैं तो कोई बड़ा हाथ मारने के लिए निकला हु !”

इस पर सेठ बोला – ” अरे भाई मेरे पास क्या है , जो तुम लुटोगे ?”

तब चोर ने कहा – ” अच्छा तो ठीक है तुम्हारी ये लाठी मुझे दे दो !”

यह सुनकर सेठ घबराया और बोला – ” नहीं भाई लाठी के बिना तो मैं चल ही नहीं पाउगा

और फिर इस जंगल से मुझे दूसरी लाठी मिलेगी भी नहीं !”

लेकिन चोर ने सेठ से लाठी छीन कर उसके दो टुकड़े कर दिए !

लाठी के दो टुकड़े ही उसमें से चार अनमोल रत्न निकले !

चोर ने उन रत्नो को सेठ को लौटाते हुए कहा – ” समज गए सेठ ?

तुमने तो कहा था की मेरे पास कुछ नहीं है और मैंने तुम्हे ये कहा था की मैं तुम्हे नहीं लूटूँगा !

फिर भी तुमने झूठ बोला ! खेर तुम जा कहा रहे हो ?

सेठ ने कहा – ‘ उज्जैनी !’

चोर ने कहा – ” मैं कल रात का उज्जैनी के राजा के जहाँ ही

चोरी करने जा रहा हु ! मुझे बड़ा हाथ मारना है !”

सेठ ने अगली सुबह जाकर राजा से सार्री बातें कह दी !

राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ की यह कैसा चोर है जो पहले बताकर चोरी करेगा !

राजा ने सारे पहरेदारो से कह दिया की आज रात वे छुट्टी पर है और रात में ही पहरेदारी करूँगा !

रात हुयी और वह चोर चुपके से नगर की चारद्वारि फांदकर नगर में घुसा राजा ने उसे देख लिया !

राजा चुपके चुपके चोर के पीछे चलने लगा ! थोड़ा सा चलकर चोर झटके से पीछे खुमा और अपने

पीछे एक आदमी को देखकर बोला – ” कोण हो तुम ?”

राजा बोला – ” मैं तुम्हारी तरह ही एक चोर हु और जहाँ चोरी करने आया हु !

मैं इस नगर के सभी रास्ते जानता हु ! अगर तुम मुझे आधा हिस्सा दो तो मैं तुम्हे

इस नगर के धनि परिवार बता सकता हु !”

चोर ने कहा चलो ऐसा ही सही !

सबसे पहले राजा चोर को नगर के प्रसिद्ध व्यापारी के गर ले गया !

राजा ने बाहर पहरा दिया चोर अंदर घुस गया !

अंदर घर की ग्रहिणी नींद में बड़बड़ा रही थी – ” अरे भाई , तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?”

यह सुनकर चोर वापिस आ गया !

राजा ने उत्सुकता से पुछा – ‘ क्या लाये ?’

कुछ नहीं ! ‘ क्यों ?’

इस घर की मालकिन ने मुझे भाई कहा ! अब तुम्ही बताओ , मैं अपनी बहन के घर में चोरी कैसे करता

बल्कि बहन तो लेने का हक़ रखती है ! मेरे पास और कुछ तो था नहीं , मगर मैंने अपने हाथ की अंगूठी

उसके बिस्तर पर रख दी और चला आया !’ यह सुन राजा की सर घूम गया !

बड़ा अजीब चोर है ! पर रात तो पूरी बाकी थी , राजा उसे एक प्रसीद जोहरी के घर ले गया !

चोर चुपके से अंदर घुसा जब वह सामान की तलाशी कर रहा था तो उसका हाथ एक नमक के बर्तन में घुस गया !

चोर ने सोचा ये भुरभुरा सा क्या है , उसने चखने के उदेश्य से एक चुटकी भरकर मुँह में डाल ली !

फिर उसे थूकते हुए बह बाहर आ गया !

राजा के पूछने पर चोर ने कहा – ‘ जिस घर का मैंने नमक खा लिया उस घर में मैं चोरी नहीं कर सकता !’

राजा इस सिद्धांतवादी चोर को देखकर बड़े आश्चर्य में पड़ गया !

अंत में राजा उसे राजमहल में ले गया !

चोर ने खजाने में से पांच सो अशर्फिया निकाली और बाहर आ गया !

ढाई सो अशर्फिया राजा को देते हुए बोला – ‘ यह तुम्हारा हिस्सा !

मैं तो राजा के यहाँ चोरी करने का जूनून लेकर चला था !

इसलिए पांच सो अशर्फिया ही चुराई ! तुमने चोरी में मेरा बराबर का साथ दिया है , ये तुम्हार अधिकार है !

उसी समय पेड़ पर बैठी एक चिड़िया चहचाह उठी !

चिड़िया की आवाज सुनकर चोर के चेहरे पर आश्चर्य के भाव उभर आये !

उसने आश्चर्य से कहा – ‘ आप,,, आप महान न्यायी राजा विक्रमादित्य है ?’

राजा चकित होकर बोला – हाँ भाई , लेकिन तुमने मुझे पहचाना कैसे ?’

चोर ने कहा – ‘ महाराज , मैं चिडियो की भाषा समझता हूँ !

अभी चिड़िया बोली की तुम जिसके साथ हो बही राजा विक्रमादित्य है !

आपके दर्शन करके मैं कृतार्थ हुआ राजन,,,,’

राजा चोर से प्रभावित तो था ही उसने चोर का सदाचरण देख

उसे अपने मंत्रिमंडल में न्याय मंत्री के पद की पेशकश की !

चोर बोला – ‘ नहीं नहीं महाराज , मैं कहाँ और आप कहाँ ! मैं ठहरा एक चोर !

मैं इस पद पर बैठूंगा तो जनता आपको बुरा भला कहेगी !’

और इतना कहकर वह अनूठा चोर अपने गाओ लोट गया !

Tagged

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *