त्रासदी

चमोली ग्लेशियर त्रासदी जब अपने भक्त को बचाने आये महादेव!

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चमोली ग्लेशियर त्रासदी जब अपने भक्त को बचाने आये महादेव:

जब चमोली जिले में ग्लेशियर फटने के दौरान जब अपने भक्त को बचाने आये महादेव, रेस्क्यू टीम देखकर भी हैरान!

ये एक सच्ची घटना है जिसे सुनकर आपकी रूह काँप जाएगी,

जब उत्तराखंड के चमोली जिले में रविववार को कुदरत के केहर भरपाते हुए भारी तबाही मचाई !

बही नित्ति घाटी के रैनि गाओ के शीर्ष भाग में ऋषि गंगा मुहाने पर,

सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर ग्लेशियर का एक हिंसा टूटकर ऋषि गंगा में गिरगया!

जिससे नदी में भीषण बाढ़ आगयी!

और इस जल प्रलय से नदी पर निर्मित 13 मेगा बाउट की ऋषि गंगा जल विद्युत् परयोजना पूरी तरह से तबाह हो गयी!

लेकिन ये भयंकर तबाही भी महादेव के चमत्कार के आगे झुक गयी!

और इसका जीता जगता उदाहरण है चमोली के रहने वाले एक किसान की जिन्होंने जे महादेव की सच्ची घटना अपनी आँखों से देखि,

उन्होंने देखा की इस भारी त्रासदी के दौरान खुद महादेव ने कैसे बचाई उनकी जान?

इस भारी त्रासदी के दौरान महादेव ने कैसे बचाई अपने भक्त की जान!

जिस किसान ने ये त्रासदी देखि बो चमोली के गाओ के रहने वाले है!

ऊतराखंड देव भूमि के जन्म होने कारण बह बचपन से ही उनकी भगवान् शिव पर गहरी आस्था है!

घर में स्थित पूर्वजो के स्थापित मंदिर में पूजा पाठ करते है,

और प्रतिदिन वो भगवान् का नाम लेकर खेतो की देख रेख को चले जाते है!

आज भी वो हमेशा की तरह अपने खेतो में देख रेख के लिए जा रहे थे ,

की तभी कुछ ऐसा हुआ की उनकी आँखे पल भर के लिए फटी की फटी रह गयी!

हुआ यु जब वो हर रोज की तरह अपने खेत की देख रेख करने जा रहे थे,

तभी उन्हें अचानक बजुर्ग साधुओ का समूह मिला जो की रास्ता भटक गए थे,

चमोली ग्लेशियर त्रासदी जब अपने भक्त को बचाने आये महादेव!

वो उनसे रास्ता पूछने लगे उस किसान ने उन साधुओ को रास्ता बता दिया,

मगर साधु लोग उस किसान को उनके साथ थोड़ा दूर तक चलने को बोलने लगे,

काफी सोचने के बाद उस किसान ने ये बोलकर मना कर दिया,

की बह किसी जरुरी काम से अपने खेतो में जा रहे है, बह अभी उन् साधुओ के साथ नहीं चल पाएंगे!

मगर साधु उस किसान की बात नहीं मान रहे,

और उसे बोलने लगे की आखिर हमारी सेवा से बड़ा तुम्हारे लिए अभी क्या हो सकता है!

क्या इस समय तम्हे हम साधुओ का आदर तो करना ही चाहिए,

उन साधुओ की बात सुनकर किसान का रोम रोम कांप उठा और उसे ऐसा प्रतीत हुआ की जैसे ये कोई मामूली साधु नहीं है!

क्युकी उनके चेहरे पर एक अलग ही प्रकार का तेज था!

कुछ पल के लिए उस किसान को ऐसा अहसास हुआ की स्वयं उसके सामने देवो के देव महादेव ही खड़े हो!

उस किसान ने अपने सारे काम शोड़के उन साधुओ की सेवा का निर्णय लिया,

और उनके साथ चला गया उन साधुओ की सेवा करने के बाद जब वो किसान अपने खेतो की तरफ वापिस आने लगा,

तब उस किसान की आँखों के आगे का नजारा था,

उसे देख पल भर के लिए मानो तो उस किसान की आँखों में बादल शाह गए हो!

जब वो किसान अपने खेत की तरफ जा रहा था तो उसने देखा,

की उसका खेत पूरी तरह भाड़ के पानी में डूबा हुआ था,

अगर वो किसान 5 मिनट पहले आता तो शायद वो किसान भी इस बाढ़ के पानी बह गया होता,

और उसने प्राण त्याग दिए होते वो किसान समज गया था की वो साधु कोई मामूली नहीं थे,

क्युकी अगर वो किसान उस समय उन साधुओ के साथ नहीं जाता तो आज वो किसान जीवित नहीं होता!

अगले दिन जब उस किसान ने ये त्रासदी वाली खबर अपने टीवी पर देखि,

तो वो मन ही मन भगवान् देवो के देव महादेव का धन्यबाद करने को आतुर हो गया,

तो इस घटना से यह पता चलता है की,

“अकाल मृत्यु वो मरे, जो काम करे चांडाल का, काल भी उसका क्या भिगाडे,जो भक्त हो महाकाल का”

और ये बात आज भी सच होती है,

जिस भक्त पर देवो के देव महादेव की कृपा हो जाये तो उसका कोई बाल भी बांका कोई नहीं कर सकता!

Conclusion:

जहा हमने देखा की कैसे देवो के देव महादेव ने अपने परम भक्त को चमोली ग्लेशियर की त्रासदी के दौरान जब अपने भक्त को बचाया,

इतने बड़ी त्रासदी से उसको बचाया!

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