कहानी

महाभारत के भीम और हनुमान जी में शक्ति संवाद!

महाभारत के भीम और हनुमान जी में शक्ति संवाद!

भीम और हनुमान जी में शक्ति संवाद!

(Bheem & hanuman shakti story in hindi)

हिन्दू धर्म के अनुसार भीम और हनुमान जी पौराणिक कथा के दो अहम पात्र थे!

महाभारत में पांडव जब जुए मैं हार गए,

तो पांडवो को हार खाने का दुष्परिणाम भुक्तना पड़ा !

वे अपना कठिन समय इधर उधर जंगल में भटककर बतीत करने लगे!

उस समय बनवास में ये लोग गंधमाधन पर्वत पर रह रहे थे!

एक दिन एक बहुत ही सूंदर और महमोहक खुसबूदार सहस्रदल कमल उड़ता हुआ द्रोपती की और आया !

कमल को अनोखी सुंदरता और खुसबू देखकर द्रोपती का मन मुघ्द हो गया,

और उन्होंने कमल को लपक लिया उस समय भीम भी पास ही खड़े थे!

भीम को कमल दिखाते हुए द्रोपती ने एक और ऐसा कमल लाने का उनसे अनुरोध किया!

भीम ने द्रोपती को वैसा ही कमल लाकर देने का आश्वासन दिया,

और उस और चल पड़े जिधर से कमल उड़ता हुआ आया था!

चलते समय बल के नशे के चूर भीम गर्जना उनका स्वभाव था!

उसकी इस भीषण गर्जना से जंगल भी कांप उठा,

और जंगल के पशु और पक्षी भी डरकर इधर उधर भागने लगे,

कुछ दूर चलने पर गंधमाधन पर्वत पर उन्हें एक विशाल केले का वन मिला!

महाबली भीम शेर  की तरह गरजते हुए उसके भीतर घुस गए!

मनुष्य में जब शक्ति का घमंड समा जाता है तो वह परिणाम के विषय में नहीं सोचता!

बस उसके दिमाग में जहि रहता है के उसे कोई भी पराजित नहीं कर सकता!

उसी बन में महावीर हनुमान जी रहते थे !

उन्हें भीम के उस और आने का पता लग गया क्युकी स्वर्ग मार्ग में आगे जाना भीम के लिए डरावना था !

अत्यंत उन्होंने सोचा के भीम को आगे आने से किसी तरह रोका जाए,

यही सोचके हनुमान जी भीम के रास्ते में लेट गए और उन्होंने अपना रूप एक रोगी के जैसा बना लिया !

भीम गरजते हुए उनके समीप पहुंचे हनुमान चुपचाप अपनी आंखे मूंदे हुए लेते रहे!

भीम ने उन्हें जगाने के लिए गर्जना की और हनुमान जी ने आंखे खोली,

और अपेक्षा पूर्वक भीम की और देखते हुए बोले भैया मैं तो रोगी हु ,

यहाँ एकांत पाकर आराम से सो रहा था परन्तु तुमने आकर मेरी नींद भंग कर दी,

बुद्धिमान इंसान को जीवो पर दया करनी चाहिए!

भीम ने कहा कृपा करके आप रास्ता षोडें और मुझे जाने दे!

हनुमान जी बोले परन्तु जहा से आगे ये पर्वत मनुष्यो के लिए वर्जित है,

आगे जाना तुम्हारे लिए सुरक्षित नहीं है तुम यही से मीठे स्वादिस्ट फल खाकर जहा से लोट जाओ,

आगे जाकर व्यर्थ ही अपने प्राणो को संकट में क्यों डालते हो ?

इसपर भीम अकड़कर बोले परामर्श के लिए दन्यबाद मैं मरु जा जीवित बच्चू ,

आपसे तो इस विषय में कुछ नहीं पूछ रहा ,

बस उठकर मुझे थोड़ा रास्ता देदो!

हनुमान जी भीम के हठ को समज गए थे की वह मानने वाला नहीं है !

अत्यंत उन्होंने लेटते ही भीम से कहा भैया मैं तो रोग से पीड़ित हु उठ सकना मेरे लिए कठिन है !

अगर तमने जाना ही है तो मुझे लांग कर चले जाओ!

भीम ने कहा मैं ऐसा नहीं कर सकता समस्त प्राणियों के शरीर में ईश्वर वास करते है!

फिर किसे के ऊपर से लांग के मैं उनका अपमान क्यों करू !

हनुमान जी ने उत्तर दिया तो भैया ऐसा करो की मेरी पूछ पकड़कर तनिक एक और हटा दो और चले जाओ!

हनुमान जी के कहने पर भीम ने सोचा चलो एक कुछकाय वानर है,

पूछ पकड़कर एक और सरका देते है रास्ता बन जायेगा!

उन्होंने बांये हाथ  से पूछ पकड़कर सरल ढंग से पूछ खींची,

किन्तु वह उनसे जरा भी नहीं हिली उन्होंने द्बारा पूछ को शक्ति लगाकर खिंचा,

पर हैरानी यह हुयी वह तस से मस न हुयी,

गुस्से में भीम क्रोध में भरगये और दोनों हाथो से पूछ को खींचना शुरू कर दिया !

जब भीम की सारी शक्ति विकार चली गयी और वह पसीना पसीना हो गए !

तो उनका मस्तक लज्जा के कारण झुक गया वह समज गए के साधारण सा रोगी दिखने वाला यह साधारण वानर नहीं है!

वह हनुमान जी के चरणों में गिर पड़े और शमा मांगने लगे,

हनुमान जी ने तब भीम को अपना परिचय दिया और कहा सुनो भीम कभी भी अपनी शक्ति का घमंड नहीं करना चाहिए !

इसके इलावा उन्होंने भीम को अनेक उपदेश दिए,

और वही से वापिस लोटा दिया उन्होंने भीम को वरदान भी दिया,

कहा के महाभारत के युद्ध के समय वह अर्जुन की ध्वजः पर बैठकर उसकी सहायता करेंगे !

महाभारत के भीम का परिचय

महाभारत के भीम का पूरा नाम भीमसेन था!

उनका जन्म ह्स्त्नापुर के राजा पाण्डु और माता कुंती के घर में हुआ !

वह पांच भाई थे और उनके नाम युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव और भीम खुद थे !

पांचो भाईओ की पत्नी का नाम द्रोपती था जिसे पांचाली के नाम से भी जाना जाता है!

उनके दो पुत्र थे घटोत्कच, सुतासोमा! उनका शस्त्र गधा था !

भीम अपने पांचो भाईओ में सबसे शक्तिशाली माने जाते थे !

महाभारत के अनुसार पांचो भाईओ में सभी चीजे बांटकर खाने

के कारण भीम की माता कुंती ने जब एक दम अपने मुँह से यह बात भीम को केह दी

के पांचो भाई बाँट लो जब की भीम द्रोपती को लेकर द्वार पर खड़ा था !

तो माता कुंती के इस वरदान से द्रोपती पांचाली बनी क्युकी पांचो भाई माता कुंती के कहने पर अटल थे !

रामायण के हनुमान जी का परिचय

हनुमान जी को पवन पुत्र के नाम से भी जाना जाता है !

उनके पिता का नाम केसरी और माता का नाम अंजना है!

वह भगवान राम के परम् भक्त है और शिव के अवतार है !

उनका शस्त्र गदा है, और वह वानर जाती में सबसे ज्यादा बुद्धिमान और शक्तिशाली है !

Conclusion:

इस कहानी का सार यह है की अपनी शक्ति का घमंड कभी भी कमजोर और वेबस प्राणी पर नहीं दर्शाना चाहिए!

भीम और हनुमान जी में शक्ति संवाद की कहानी ये शिक्षा सिखाती है !


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