धार्मिक

भगवान शिव कौन है और शिव किसके ध्यान में मग्न रहते है?

भगवान शिव कौन है

भगवान शिव कौन है?

(Who is lord shiva in hindi)

शिव आपके सर्वोच्च स्व हैं, ब्रह्मांड के स्वामी (विश्वनाथ) भगवान शिव खुद कहते हैं,

तुम मेरे हो, मैं तुम हूँ, मुझे मत खोजो मुझे पहचानो,

मैं तुम्हारे दिल में हूँ, मैं दिव्य प्रकाश हूँ,

और सर्वोच्च आत्मा हूँ “जो बंधन में है वह शव है जो मुक्त है वो शिव है”

भगवान शिव की उत्पत्ति कैसे हुयी?

(Origin of lord shiva)

एक कहानी है,

भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा यह निर्धारित करने के लिए लड़ रहे थे,

कि सबसे अच्छा भगवान कौन था!

अचानक उनके बीच आग का एक विशाल खंभा दिखाई दिया!

एक कहानी में उन्होंने स्तंभ के

आरंभ या अंत का पता लगाने की कोशिश की और बाद में,

भगवान शिव नहीं उभरे और जैसा कि वह शुरुआत या अंत के बिना थे,

वह स्पष्ट रूप से अब जो था उससे बेहतर था!

एक अन्य स्तंभ में दोनों से बात की और कहा कि जो

कोई भी शुरुआत या अंत पा सकता है, वह स्पष्ट रूप से श्रेष्ठ है।

भगवान विष्णु शुरुआत खोजने गए,

भगवान ब्रह्मा शुरुआत खोजने के लिए ऊपर गए।

न तो वास्तव में यह पाया गया,

लेकिन भगवान ब्रह्मा ने झूठ बोलने का फैसला किया,

और कहा कि उन्होंने वह किया,

जो भगवान शिव जानते थे कि वे नहीं करते।

मुझे लगता है कि यह भगवान महादेव की एक कहानी है,

जो भगवान ब्रह्मा के सिर को काटती है

(फिर से उस कहानी के कई संस्करण भी हैं)

वैसे भी, लंबी कहानी का अर्थ शिव ही है।

और स्पष्ट रूप से अंतहीन है।

भगवान शिव का जन्म कैसे हुआ?

(Lord shiva birth)

भगवान शिव अजन्मे (जन्म नहीं) और अनंत हैं,

वो खुद से प्रकट हुए, इसीलिए उनको शम्बू ( खुद से प्रकट) भी कहा जाता है,

वो संसार के प्रथम गुरु भी हैं

भगवान् शिव से देवता,राक्षस,यक्ष,किन्नर,अघोरी सब उनके अधीन है

और उनसे ज्ञान प्राप्त करते है!

भगवान् शिव ने अपना रूप एक अग्नि स्तंभ से प्रकट होकर लिया था ,

प्रथम बार परमेश्वर शिव ने साकार स्वरूप धारण किया था,

इसलिए भगवान् शिव के निराकार स्वरूप को शिवलिंग ( लिंग का संस्कृत अर्थ स्वरूप होता है)

तथा साकार स्वरूप दोनों के रूप में पूजा जाता है!

भगवान शिव के माता पिता का क्या नाम है?

(Mother & Father of lord shiva)

तंत्र साधना में भगवान शिव को भैरव के नाम से भी जाना जाता है !

हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओ में से एक है भगवान शिव !

वेद में इन्हे रूद्र के नाम से भी जाना जाता है !

शिव इंसान की चेतना के स्वामी है यानी इंसान के मन की बात पड़ने वाले है !

इनकी पत्नी देवी पार्वती को शक्ति के रूप में पूजा जाता है !

उनकी पूजा शिवलिंग और मूर्ति दोनों रूपु में की जाती है ! भगवान् शिव परम ब्रम्ह है !

प्राचीन विद्वान इन्ही को ईश्वर कहते है !

सदाशिव ने अपने शरीर से देवी शक्ति की

सृष्टि की जो उनके अपने अंग से कभी अलग वाली नहीं थी !

देवी शक्ति को पार्वती के रूप में जाना गया और भगवान् शिव को अर्धनारीश्वर के रूप में !

वही देवी शक्ति को प्रकृति , गुणवती माया , बुद्धितत्व की जननी तथा विकार रहित मन गया है !

श्रीमद देवी महापुराण के मुताविक:

भगवान् शिव के पिता के लिए भी एक कथा है !

देवी महापुराण के मुताविक ,

एक वार जब नारदजी ने अपने पिता ब्रम्हाजी से सवाल किया

की इस सृष्टि का निर्माण किसने किया ?

आपने, भगवान विष्णु ने या फिर भगवान शिव ने ?

आप तीनो को किसने जन्म दिया ? जानी आप तीनो के माता पिता कोण है ?

तब ब्रम्हाजी ने नारदजी से त्रिदेवो के जन्म

की गाथा का वर्णन करते हुए कहा की देवी दुर्गा और शिव सवरूप

ब्रह्मा के योग से ब्रह्मा ,विष्णु और महेश की उत्पत्ति हुयी है

यानि प्रकृति सवरूप दुर्गा ही माता है और ब्रह्मा अर्थात काल सदाशिव पिता है !

एक और कथा अनुसार एक वार

ब्रह्माजी और विष्णुजी का झगड़ा हो गया क्युकी ब्रह्माजी ने कहा ,

में तेरा पिता हु , क्युकी ये सृष्टि मुझसे उतपन हुयी है !

इस पर विष्णुजी ने कहा की मई तेरा पिता हु ! तू मेरी नाभि कमल से उतपन हुआ है !

भगवान शिव ने विष्णुजी और ब्रह्माजी के बीच आकर कहा

, हे पुत्रो , मैंने तुमको जगत की उतपत्ति

और स्थिति रुपी दो कार्य दिए है !

इसी प्रकार मैंने शंकर और रूद्र को दो कार्य संहार और तिरोगति दिए है !

मुझे वेदो में ब्रह्म कहा गया है ! मेरे पांच मुख है !

एक मुख से अकार (अ), दूसरे मुख से उकार (उ), तीसरे मुख से मुकार (म) चौथे मुख से बिंदु (.)

तथा पांचवे मुख से नाद (शब्द) प्रकट हुए है !

उन्ही पांच शब्दों से एकीभूत होकर एक अक्षर (ॐ) बना है ! यह मेरा मूल मंत्र है!

शिव महापुराण के प्रकरण से सिद्ध हुआ

की शंकर की माता अष्टंगी देवी तथा पिता सदाशिव अर्थात “काल ब्रह्मा”है !

शिव किसका ध्यान करते है?

भगवान् शिव विलहन का कार्य करते हैं , व श्री विष्णु सृष्टि पालन का!

अपने अपने कार्य को संपूर्ण करने हेतु दोनों देवताओं को एक दूसरे की आवश्यकता होती है!

भगवान् शिव और भगवान् विष्णु जी के इस

प्रेम एवं भक्ति को इस प्रकार ग्रंथों/पुराणों इत्यादि में दिखाया गया है!

भगवान् रूद्र काल के देवता है और काल से किसका नाश करना है,

और किसको क्षतिहीन रखना है, ये निर्णय भी शिव एवं विष्णु जी परस्पर लेते हैं!

रामेश्वर तीर्थ की व्याख्याएं भगवान् शिव एवं श्री विष्णु के

मुख से भिन्न भिन्न रूप से निम्नलिखित प्रकार से कथित हैं

भगवान् शिव कहते हैं , “रामेश्वर तु राम यस्य ईश्वर” , अर्थात राम जिसके ईश्वर हैं!

भगवान् विष्णु कहते हैं ,“रामेश्वर तु रामस्य य: ईश्वर”, अर्थात जो राम के ईश्वर हैं!

भगवान शिव के 12 ज्योत्रिलिंगो के नाम क्या है?

( Lord shiva 12 jyotriling name)

1.) सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: गुजरात

2.)मलिका अर्जुन ज्योतिर्लिंग: आन्ध्र प्रदेश

3.) महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग: उज्जैन, मध्य प्रदेश

4.) ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: उत्तरी भारत

5.) केदारनाथ ज्योतिर्लिंग: उत्तराखंड

6.) भीमशंकर ज्योतिर्लिंग: डाकिनी, महाराष्ट्र

7.) विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग: काशी, उत्तर प्रदेश
8.) त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग: नासिक, महाराष्ट्र
9.) वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग: झारखण्ड
10.) नागेश्वर ज्योतिर्लिंग: बड़ौदा, गुजरात
11.) रामेश्वर ज्योतिर्लिंग: तमिलनाडु
12.) घृश्णेश्वर ज्योतिर्लिंग: महाराष्ट्र

Conclusion:

हमने ऊपर भगवान शिव के विषय पर बात की है

भगवान शिव जो अजर है अमर है जैसे कहते है

“जो बंधन में है वह शव है जो मुक्त है वो शिव है”

उनके कई नाम है और वो हमेशा भगवान विष्णु

का ध्यान में मग्न रहते है और भगवान विष्णु उनके ध्यान में!

 

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