त्यौहार

2021 Angarki Sankashti Chaturthi Vrat Katha

Angarki Sankashti Chaturthi

Angarki Sankashti Chaturthi

अंगारकी चतुर्थी व्रत कथा महत्व

गणेश पुराण उपासना खंड अध्याय 7

Angarki Sankashti Chaturthi व्रत कथा

इस प्रकार है

भारद्वाज मुनि के पुत्र का नाम था अरुण और अरुण उनका नाम इसलिए था

क्युकी वह थोड़े से रक्तवर्णीय थे !

थोड़े से लाल रंग के थे इसलिए उनका नाम अरुण था

बचपन में ही भारद्वाज मुनि ने अपने पुत्र अरुण

को पृथ्वी माता को धरती माता को समर्पित किया था!

फिर पृथ्वी माता ने उनका पालन पोषण करके उनको 7 साल की आयु तक बड़ा किया!

जैसे ही 7 वर्ष की आयु हुयी पृथ्वी माता ने वापिस

ऋषि भारद्वाज को उनके पुत्र को वापिस सौंप दिया !

भारद्वाज मुनि को अपने पुत्र को सौंपने के बाद उनके पुत्र को वेदो का अध्यन सिखाया

पुराणों का अध्यन सिखाया उपनषिद का अध्यन सिखाया !

उन्हें मंत्र दीक्षा आदि दी उन्हें संस्कार सिखाये और जब यह पूर्ण हो जाता है !

तद्पश्चात भारद्वाज मुनि स्वे ही अपने पुत्र को गणेश मंत्र की दीक्षा देते है

की अब तू यह मंत्र लो उसका सविधि शास्त्र अनुष्ठान करो

जिसके अनुष्ठान मात्र से गणेश जी की पूर्ण कृपा तुझे प्राप्त होगी

और तुम बहुत बड़े विद्वान् बनोगे विश्व के अंदर !

तब पिता के इस प्रकार से मंत्र दीक्षा देने के बाद वह मंत्र लेकर उनके पुत्र अरुण थे

वो गंगा जी के तट पर जो कहा जाता है

पुण्य सलिला तट वहां जाकर उन्होंने गणपति का उस मंत्र का अनुष्ठान किया

और उस मंत्र के अनुष्ठान से उनका मनोवल बढ़ता गया

और तपोवल उनका बहुत बढ़ता गया तब इतना बढ़ने लगा

उनका शरीर पहले से ही इतना रक्तवर्णीय था !

किन्तु धीरे धीरे वो और रक्तवर्णीय होने लगे

गणेश जी के मंत्र के अनुष्ठान के वजह से फिर थोड़े समय के बाद

माघ माह की कृष्णा चतुर्थी के सायं काल में जब चंद्र उदय होता है !

तब उसी समय पर भगवान गणेश जी प्रस्सन होते है

और फिर उसे कहता है ,

हे ! मेरे परम् भक्त अरुण मैं आपके इस अनुष्ठान से तपोवल से प्रस्सन हुआ

आप जो वरदान मांगो मैं अवश्य यह वरदान दूंगा

आप जो वरदान मांगोगे मैं जरूर दूंगा

फिर अरुण ने कहा मेरा तो जन्म वैसे ही सफल हो चूका है !

आपके दर्शन मात्र से अपितु न सिर्फ मेरा मेरी जो पृथ्वी माता है,

उनका भी और मेरे जो पिता है महर्षि भारद्वाज मुनि है ,

उनका भी अब जन्म सफल हो चूका है !

क्युकी उनके ही आशीर्वाद से मैंने आपको प्रस्सन किया है

और जैसे ही आप मेरे अनुष्ठान से मेरे तपोवन से प्रस्सन हुए हो

मेरे सभी तत्काल पाप नष्ट हो गए है !

इससे ज्यादा और क्या मांगू फिर भी आपने

मुझे यह वर प्रदान करने का अगर आशीष प्रदान किया है

तो मैं सिर्फ इतना ही मांगूगा की आप इस समय प्रस्सन हुए है

यानी की माघ कृष्ण की चतुर्थी को प्रस्सन हुए है

जिस दिन यानी उस दिन मंगलवार भी था अर्थात अंगारकी चतुर्थी भी उसी दिन थी !

तो पृथ्वी पर सबसे अधिक पुण्यमय तिथि जो होगी जा संकष्ट चतुर्थी जो 12 महीनो की है

सबसे पुण्य मई चतुर्थी कहलाएगी जा सुप्रसिद्ध हो वो हो माघ कृष्णा चतुर्थी !

हे ! गजानन आप मुझे यह वरदान दीजिये

की जो कोई भी आपका भक्त माघ कृष्णा चतुर्थी का व्रत करेगा

तो उसे भी आपका वरदान प्राप्त होगा !

और उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होगी

उनके सभी संकटो का विनाश हो जाए ऐसा आप मुझे वरदान दीजिये

भगवान ने कहा तथास्तु उसी के साथ भगवान गणेश जी ने और उसे एक वरदान दिया

की जैसे तम्हारा रक्तवर्ण है

आज तुम अरुण नहीं किन्तु अंगारक नाम से पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध होंगे

और आज चतुर्थी के दिन वो भी मंगलवारी चतुर्थी के दिन मैं प्रकट हुआ हु

इसलिए जो कोई भी मनुष्य मंगलवार चतुर्थी का व्रत करेगा

उसे अंगारकी व्रत कहलायगा भो अंगारकी चतुर्थी व्रत कहलायगा

और साथ ही साथ पूरे एक वर्ष की चतुर्थी का जो फल प्राप्त होता है

वो केवल एक ही मंगलवार यानी अंगारकी चतुर्थी जी का व्रत करने का फल उसे प्राप्त होगा

तो यह वरदान गणेश जी ने अरुण को दिया

और तभी से माघ महीने की कृष्णा चथुर्ति सबसे अधिक पुण्यमयी भगवान गणेश जी की

सबसे प्रिय और गणेश जी को प्रस्सन करने वाली

और हमारे सभी संकटो का विनाश करने वाली

अगर कोई सबसे पुण्यदायी तिथि है संकष्टी चथुर्ति व्रत है वो है माघ कृष्ण चथुर्ति !

गणपति अर्घ्य मंत्र

अर्घ्य देने की विधि और मंत्र

संकष्टहर में देव गृहाणार्घ्यं नमोस्तुते ||

ॐ गणेशाय नमस्तुभ्यं सर्व सिद्धिप्रदायक |

कृष्णपक्षे चतुर्थ्याँ तु सम्पूजित विधूदये |

क्षिप्रं प्रसीद देवेश गृहाणार्घ्यं नमोस्तुते ||

“ॐ संकष्टहरणगणपतये नमः”

चतुर्थी तिथी अर्घ्य मंत्र

तिथीनामुत्तमे देवि गणेशप्रियवल्लभे |

सर्वसंकटनाशाय गृहाणार्घ्यं नमोस्तुते ||

“ॐ चतुर्थ्यै नमः”

चंद्र अर्घ्य मंत्र

गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक ||

ॐ गगनार्णवमाणिक्य चंद्र दाक्षायणीपते |

“ॐ चन्द्राय नमः”

conclusion:

ऊपर आप पड़ेंगे 2021 Angarki Sankashti Chaturthi व्रत कथा जो की

भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए लोग रखते है

और जिससे रखने से गणेश जी अपने भक्तो पर सदैव किरपा बनाई रखते है !

 

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